Sunday, July 17, 2016

साउदी अरबका मुस्लिम धर्म गुरु ने खुद खुलसा किया कि मक्का मे हे शिव लिङ्ग और मकेस्वर धाम

जनकपुर ; सावन २ 

सम्‍पूर्ण विश्‍व क्‍या भारत के लोग ही यह कटु सत्‍य स्‍वीकार नही कर सकते कि इस्लाम ने हिन्दू की आस्‍था माने जाने वाले असंख्‍य मंदिर तोड़े है और उनके स्‍थान पर उसी मंदिर के अवशेष से मस्जितों को निर्माण करवाया। इस्‍लामिक विध्‍वंशक गतिविधियां इतनी प्रंचडता के साथ की जाती थी कि तक्षशिला विश्वविद्यालय और सोमनाथ मंदिर विध्‍वंश किये गये। इस्लाम नीव इस आधार पर रखी गई कि दूसरों के धर्म का अनादर करों और उनको नेस्‍तानाबूत और पवित्र स्थलों को खंडित कर वहाँ मस्जित और मकबरे का निर्माण किया किया जाए। इस काम बाधा डालने वाले जो लोग भी सामने आये उन लोगो को मौत के घाट उतार दिया जाये। भले ही वे लोग मुस्लिमो को परेशान न करते हो। मुहम्‍मद साहब और मुसलमानों के हमले से मक्‍का और मदीना के आस पास का पूरा इतिहास बदल दिया गया। इस्लाम एक तलवार पे बना धर्म था है और रहेगा और इसका अंत भी उस से ही होगा किंतु पी एन ओक ने सिद्ध कर दिया है मक्केश्वर शिवलिंग ही हजे अस्वद है। मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। 

द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का मानना है कि मक्का में मक्केश्वर महादेव मंदिर है। मुहम्मद साहब भी शैव थे, इसलिए वे मक्केश्वर महादेव को मानते थे। एक बार वहां लोगों ने बुद्ध की मूर्ति लगा थी, वह इसके बहुत विरोधी थें।

अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है 'मक्केश्वर लिंग' (मक्केश्वर महादेव)

मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।

मक्का के गेट पर साफ-साफ लिखा था कि काफिरों का अंदर जाना गैर-कानूनी है। कहा जा रहा है अब इस बोर्ड को उतार दिया गया है और लिख दिया है नॉन-मुस्लिम्स का अंदर जाना माना है। इसका मतलब है कि ईसाई, जैनी या बौद्ध धर्म को भी मानने वाले इसके अंदर नहीं जा सकते हैं।
मुसलमाने के पैगम्‍बर मुहम्‍मद एक ऐसे विध्‍वंसक गिरोह का नेतृत्‍व करते थे जो धन और वासना के पुजारी थे। मुहम्‍मद ने मदीना से मक्का के शांतिप्रिय मुर्तिपूजकों पर हमला किया और जबरजस्‍त नरसंंहार किया। मक्‍का का म‍दीना के अपना अगल अस्तितव था किन्‍तु मुहम्‍मद साहब के हमले के बाद मक्‍का मदीना को एक साथ जोड़कर देखा जाने लगा। जबकि मक्‍का के लोग जो कि शिव के उपासक माने जाते है। मुहम्‍मद की टोली ने मक्‍का में स्‍थापित कर वहां पे स्थापित की हुई 360 में से 359 मूर्तियाँ नष्ट कर दी और सिर्फ काला पत्थर सुरक्षित रखा जिसको आज भी मुस्‍लिमों द्वारा पूजा जाता है। उसके अलावा अल-उज्जा, अल-लात और मनात नाम की तीन देवियों के मंदिरों को नष्ट करने का आदेश भी महम्मद ने दिया और आज उन मंदिरों का नामो निशान नहीं है (हिशम इब्न अल-कलबी, 25-26)। इतिहास में यह किसी हिन्दू मंदिर पर सबसे पहला इस्लामिक आतंकवादी हमला था।उस काले पत्थर की तरफ आज भी मुस्लिम श्रद्धालु अपना शीश जुकाते है। किसी हिंदू पूजा के दौरान बिना सिला हुआ वस्त्र या धोती पहनते हैं, उसी तरह हज के दौरान भी बिना सिला हुआ सफेद सूती कपड़ा ही पहना जाता है।

जिस प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

जिस प्रकार हिंदुओं की मान्यता होती है कि गंगा का पानी शुद्ध होता है ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी अबे जम-जम के पानी को पाक मानते हैं। जिस तरह हिंदू गंगा स्नान के बाद इसके पानी को भरकर अपने घर लाते हैं ठीक उसी प्रकार मुस्लिम भी मक्का के अबे जम-जम का पानी भर कर अपने घर ले जाते हैं। ये भी एक समानता है कि गंगा को मुस्लिम भी पाक मानते हैं और इसकी अराधना किसी न किसी रूप में जरूर करते हैं।

मक्का मदीना का सच
मुसलमानों के सबसे बड़े तीर्थ मक्का मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत यानी काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इस सम्‍बन्‍ध में प्रख्‍यात प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में समझाया है कि मक्का और उस इलाके में इस्लाम के आने से पहले से मूर्ति पूजा होती थी। हिंदू देवी-देवताओं के मंदिर थे, गहन रिसर्च के बाद उन्होंने यह भी दावा किया कि काबा में भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग है। पैगंबर मोहम्मद ने हमला कर मक्का की मूर्तियां तोड़ी थीं। यूनान और भारत में बहुतायत में मूर्ति पूजा की जाती रही है, पूर्व में इन दोनों ही देशों की सभ्यताओं का दूरस्थ इलाकों पर प्रभाव था। ऐसे में दोनों ही इलाकों के कुछ विद्वान काबा में मूर्ति पूजा होने का तर्क देते हैं। हज करने वाले लोग काबा के पूर्वी कोने पर जड़े हुए एक काले पत्थर के दर्शन को पवित्र मानते हैं जो कि हिन्‍दूओं का पवित्र शिवलिंग है। वास्‍तव में इस्लाम से पहले मिडिल-ईस्ट में पीगन जनजाति रहती थी और वह हिंदू रीति-रिवाज को ही मानती थी।

एक प्रसिद्ध मान्‍यता के अनुसर है कि काबा में “पवित्र गंगा” है। जिसका निर्माण महापंडित रावण ने किया था, रावण शिव भक्त था वह शिव के साथ गंगा और चन्द्रमा के महात्‍म को समझता था और यह जानता था कि कि क‍भी शिव को गंगा से अलग नही किया जा सकता। जहाँ भी शिव होंगे, पवित्र गंगा की अवधारणा निश्चित ही मौजूद होती है। काबा के पास भी एक पवित्र झरना पाया जाता है, इसका पानी भी पवित्र माना जाता है। इस्लामिक काल से पहले भी इसे पवित्र (आबे ज़म-ज़म) ही माना जाता था। रावण की तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान शिव ने रावड़ को एक शिवलिंग प्रदान किया जिसें लंका में स्‍थापित करने का कहा और बाद जब रावड़ आकाश मार्ग से लंका की ओर जाता है पर रास्ते में कुछ ऐसे हालत बनते हैं की रावण को शिवलिंग धरती पर रखना पड़ता है। वह दुबारा शिवलिंग को उठाने की कोशिश करता है पर खूब प्रयत्न करने पर भी लिंग उस स्थान से हिलता नहीं। वेंकटेश पण्डित के अनुसर यह स्थान वर्तमान में सऊदी अरब के मक्का नामक स्थान पर स्थित है। सऊदी अरब के पास ही यमन नामक राज्य भी है जहाँ श्री कृष्ण ने कालयवन नामक राक्षस का विनाश किया था। जिसका जिक्र श्रीमदभगवत पुराण में भी आता है।

मक्का मदीना की फोटो जिसमें मक्केश्वर महादेव है
पहले राजा भोज ने मक्का में जाकर वहां स्थित प्रसिद्ध शिव लिंग मक्केश्वर महादेव का पूजन किया था, इसका वर्णन भविष्य-पुराण में निम्न प्रकार है :-
"नृपश्चैवमहादेवं मरुस्थल निवासिनं !
गंगाजलैश्च संस्नाप्य पंचगव्य समन्विते :
चंद्नादीभीराम्भ्यचर्य तुष्टाव मनसा हरम !
इतिश्रुत्वा स्वयं देव: शब्दमाह नृपाय तं!
गन्तव्यम भोज राजेन महाकालेश्वर स्थले !! "

तो बेलायती तागत हे dr . ck raut के साथ । जि ह ए हम नहि कहते हे ए बेलायत के सरकार ने .......?

जनकपुर : सावन २

जुलाई ४: आज के ही दिन 1776 ई. में संयुक्त राज्य अमेरिका ने विलायती उपनिवेश से स्वतन्त्रता की घोषणा की थी। अमेरिका को विलायती औपनिवेशिक शासन से मुक्त करके उन्हें विश्व मानचित्र पर महान देश बनाने वाले  स्वतन्त्रता प्रेमी सभीअमेरिकी जनता और राष्ट्रपिताओं को नमन, और अमेरिकी जनता को स्वतंत्रता दिवस की बधाइयाँ भी।
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"हम इन सिद्धांतों को स्वयंसिद्ध मानते हैं कि सभी मनुष्य समान पैदा हुए हैं और उन्हें अपने स्रष्टा द्वारा कुछ अविच्छिन्न अधिकार मिले हैं। जीवन, स्वतंत्रता और सुख की खोज इन्हीं अधिकारों में है। इन अधिकारों की प्राप्ति के लिए समाज में सरकारों की स्थापना हुई जिन्होंने अपनी न्यायोचित सत्ता शासित की स्वीकृति से ग्रहण की। जब कभी कोई सरकार इन उद्देश्यों पर कुठाराघात करती है तो जनता को यह अधिकार है कि वह उसे बदल दे या उसे समाप्त कर नई सरकार स्थापित करे जो ऐसे सिद्धांतों पर आधारित हो और जिसकी शक्ति का संगठन इस प्रकार किया जाए कि जनता को विश्वास हो जाए कि उनकी सुरक्षा और सुख निश्चित हैं।" - अमेरिकी स्वतन्त्रता घोषणापत्र

अमरीका के निवासियों ने ब्रिटिश शासनसत्ता के अधिकारों और अपनी कठिनाइयों से मुक्ति पाने के लिए जो संघर्ष सन् 1775 ई. में आरंभ किया था वह दूसरे ही वर्ष स्वतंत्रता संग्राम में परिणत हो गया। इंगलैंड के तत्कालीन शासक जॉर्ज तृतीय की दमननीति से समझौते की आशा समाप्त हो गई और शीघ्र ही पूर्ण संबंधविच्छेद हो गया। इंगलैंड से आए हुए उग्रवादी युवक टॉमस पेन ने अपनी पुस्तिका "कॉमनसेंस" द्वारा स्वतंत्रता की भावना को और भी प्रज्वलित किया। 7 जून, 1776 ई. को वर्जीनिया के रिचर्ड हेनरी ली ने प्रायद्वीपी कांग्रेस में यह प्रस्ताव रखा कि उपनिवेशों को स्वतंत्र होने का अधिकार है। इस प्रस्ताव पर वादविवाद के उपरांत "स्वतंत्रता की घोषणा" तैयार करने के लिए 11 जून को एक समिति बनाई गई, जिसने यह कार्य थॉमस जेफ़रसन को सौंपा। जेफ़रसन द्वारा तैयार किए गए घोषणापत्र में ऐडम्स और फ्रैंकलिन ने कुछ संशोधन कर उसे 28 जून को प्रायद्वीपी कांग्रेस के समक्ष रखा और 2 जुलाई को यह बिना विरोध पास हो गया।

जेफ़रसन ने उपनिवेशों के लोगों की कठिनाइयों और आवश्यकताओं का ध्यान रखकर नहीं, अपितु मनुष्य के प्राकृतिक अधिकारों के दार्शनिक सिद्धांतों को ध्यान में रखकर यह घोषणापत्र तैयार किया था। इस घोषणापत्र में कुछ ऐसे महत्व के सिद्धांत रखे गए जिन्होंने विश्व की राजनीतिक विचारधारा में क्रांतिकारी परिवर्तन किए। समानता का अधिकार, जनता का सरकार बाने का अधिकार और अयोग्य सरकार को बदल देने अथवा उसे हटाकर नई सरकार की स्थापना करने का अधिकार आदि ऐसे सिद्धांत थे जिन्हें सफलतापूर्वक क्रियात्मक रूप दिया जा सकेगा, इसमें उस समय अमरीकी जनता को भी संदेह था परंतु उसने इनको सहर्ष स्वीकार कर सफलतापूर्वक कार्यरूप में परिणत कर दिखाया। जेफ़रसन ने ब्रिटिश दार्शनिक जॉन लॉक के "जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति" के अधिकार के सिद्धांत को भी थोड़े संशोधन के साथ स्वीकार किया। उसने संपत्ति को ही सुख का साधन न मानकर उसे स्थान पर "सुख की खोज" का अधिकार माँगकर अमरीकी जनता को वस्तुवादिता से बचाने की चेष्टा की।


भीख मागेर मधेशको विकास संभव छैन... ... dr .ck raut को भनाइ ।

जनकपुर :सावन २ 

संविधानको एक उपदफा बदल्न महिनौं आन्दोलन र सैकडो मधेशीको बलिदानीले पनि संभव हुँदैन/देखिएन | किनकि संविधान बदल्ने ताकत केवल नेपालीहरूमा छ मधेशीमा होइन | २/४ मंत्रीको कुरसी प्राप्त गर्न बहुमत पुग्ने अथवा पुग्न सक्ने दल/पार्टीको चाकड़ी या गुलामी सहनु पर्छ किनकि सरकार बनाउने ताकत नेपालीहरूमा छ मधेशीमा होइन |
 यहाँसम्म कि नेपालीहरूले मधेशका लागि छुट्टयाई दिएको बजेट बाहेक विकासका लागि थप १ करोड़ बजेट आवश्यक भयो भने त्यसका लागि पनि नेपालीहरू कै सामु महिनौं हाथ फैलाउनु पर्छ किनकि बजेट कसलाई दिने कसलाई नदिने भने अधिकार केवल नेपालीहरूमा छ, मधेशीमी होइन | यस्तो पर निर्भरताको अवस्थामा मधेशको विकास संभव छ कि विनास संभव छ ?

तसर्थ, 
पर-निर्भरता होइन, आत्मनिर्भरता आवश्यक छ | गुलामी होइन स्वतन्त्रता आवश्यक छ | अरूसँगको भीक्षा होइन, आफ्नो विकासमा स्व-इच्छा आवश्यक छ |

"नेपाली उपनिवेश अंत हो, मधेश अब स्वतन्त्र हो !"

चीनले नेपाली जग्गा फिर्ता गर्नु पर्छ । जितेन्द्र सोनल को भनाइ

 जनकपुर : सावन २ 

 तराई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टीका प्रभावसाली नेता जितेन्द्र सोनलले नेपालीको भूमि एक इन्च पनि यताउती हुनुहुँदैन बताउनुभएको छ ।  चीनले नेपालको चार किलोमिटर जमिन मिचेको समाचार बाहिर आएपछि नेता सोनलले नेपालको भूमि कुनै पनि देशले मिच्न नहुने बताउँदै उहाँले यस विषयमा राज्य गम्भिर हुनुपर्ने बताउनु भयो ।
उहाँले भन्नुभयो, यदि चीनले नेपालको भूमि मिचेको छ भने तत्काल फिर्ता गर्नुपर्छ ।भारतले नेपालको भूमि मिचियो भन्दै यहाँका राष्ट्रवादी भनाउँदाहरुले जुलुस नै प्रदर्शन गर्छन् तर आज चीनले चार किलोमिटर नेपाली भुमि मिचेको कुरा आइरहेको छ, कसैले च्यूइ पनि बोलेको छैन, नेता सोनलले भन्नुभयो, भारतले नेपालको भूमि मिच्नु ठिक हो मैले भन्न खोजेको होइन, यदि भारतले पनि मिचेको छ भने त्यो पनि फिर्ता गर्नुपर्छ ।’
मधेशी जनता सीमा रक्षा गरेर बसेको उल्लेख गर्दै उहाँले भारतले जग्गा मिचियो वा कतै हड्पेको कुरा आयो भने सीमामा बस्ने मधेशी जनता भारतीय पक्षसँग झगडा गरेको थुप्रै उदाहरणहरु रहेको बताउनु भयो । त्यस्तै चीनको बोर्डरमा बस्ने नेपालीले त्यहाँको जमिनको रक्षा गर्नुपर्ने उहाँले बताउनुभयो ।
११ नम्बर सीमा स्तम्भभन्दा चार किलोमिटर वारिको नेपाली भूमि ललुङमा घर बनाएको स्रोतले जनाएको छ । लिमीका बासिन्दा तिब्बतको पुराङ काउन्टीस्थित ताक्लाकोट बजारबाट खरिद गरेका सामान लाप्चा नाकाबाट गाउँ भित्र्याउँछन् । लामो समयदेखि यही नाका प्रयोग गरी हिउँदमा पशुचौपाया चरणका लागि चीनको भूमि उपयोग गर्दै आएको खबर कान्तिपुरमा छ । सीमा आउजाउ गर्दा उनीहरूले नयाँ संरचना बनाइरहेको देखेका हुन् ।

Saturday, July 16, 2016

नेपाल आमाको सन्तानहरु बिच सौतेला व्यवहार किन? मधेशी भएर त होईन ?

जनकपुर : साउन २

तल फोटोमा देखाएको दुवै बालक शारीरिक रुपले अपाङ्ग हुन्। रौतहट, गा.वि.स अकोलवा ७ बलुवा टोलका शेख नेशारको १० बर्षीय छोरा शेख अशदार अलि जन्मै देखि दुबै खुट्टाले अपांग छ भन्ने झापाका शेषराज दाहाल र ईश्वरा दाहालका सुपुत्र बोल्न र हिंड्न नसक्ने आदित्य दाहाल हाल काठमाडौंको कपनमा बसोबास गर्छन्।
आजको २१ ओं शताब्दीमा आदित्य संग भविष्यवाणी गर्न क्षमता रहेको प्रचार गर्दै उनलाई विलक्षण क्षमताका धनी भन्दै 'गुगल ब्वाय' को रुपमा चिनायो र सरकारबाट निरन्तर आदित्य आर्थिक सहयोग पाइराखेक छन्। सुशील कोइराला प्रम भएको बेला सरकार द्वारा उनलाई अमेरिका लगेर इलाज समेत भई सकेका छन्। हाल मात्र आदित्यको लागि घर र गाडी वापत ओली सरकार द्वारा १ करोड़ रुपैया सहयोग गरिने निर्णय मन्त्रिपरिषद बाट भएको छ।
आदित्य अस्वस्थ छन्, उनको इलाज पनि हुनु पर्छ तर अन्धविश्वासको नाउमा यसरी जनताको पैसा लुटाउनु प्रति मेरो मात्र होइन सम्पूर्ण देशवासीको घोर आपति हुनु पर्छ।
अस्ति युरोकप फ्रान्सले जित्छ भनेर भविष्यबाणी गरेका आदित्य संग साँचै 'गुगल ब्वाय' भनाउने खालको विलक्षण क्षमता रहेको छ भन्ने कुनै संघ संस्था बाट प्रमाणित हुनुपर्छ। 'GOOGLE' बाट नै प्रमाणित गराए पनि हुन्छ।
रौतहटको १० वर्षीय बालक शेख अली स्कुल जानलाई तडपि रहेको छ। उसले एकदमै confidently भन्यो-"म सित व्हील चेयर भयो भन्ने म दैनिक स्कुल पढ्न जाने छु।"
यो एउटा बालकको उधाहरण मात्र हो, यस्ता मधेश र पुरै देशमा हजारों बालकहरु छन् जो पैसाको अभावमा उपचार गराउन बाट वन्चित छन् साथै उनका चाहनाहरु मरिरहेको छ।
किन सरकार एउटा लाई लाखो पर्ने गाडी र घर उपहार, अर्कोलाई के? के यिनीहरु नेपाल आमा कि सौतेला सन्तानहरु हुन्!!
(नोट: कोई सहयोगीहात यस बालकको लागि 'व्हील चेयर' सहयोग गर्न चाहनुहुन्छ भन्ने सम्पर्क गर्नुस बालकको सिधा सम्पर्क न. पठाइदिने छु)

गठबन्धनको रिले अनशनमा आक्रमण गर्नु लज्जास्पद : डा. पंजियार


जनकपुर २०७३ साउन १ गते 

काठमाडौं, १ साउन । मधेसी युवा थिङक ट्याङकका अध्यक्ष डा.विनय पञ्जियारले शुक्रबार पहिचानका पक्षधर संघीय गठबन्धनले अहिंसात्मक बाटोको उत्कृष्ट नमूना रिले अनशनको अन्तिम दिनमा ढुंगामुढा र हातपात भएको घटनाप्रति आफ्नो गम्भीर ध्यानाकर्षण भएको जनाएका छन् ।

२५० वर्षदेखि शोषणमा पारिएका मधेसी, आदिवासी, जनजाति, दलित, मुस्लिम, थारु र अन्य बिपन्न समुदायको अधिकार संबिधानमा सुनिश्चित गराउन थालिएको यस महयज्ञमा जो सकैले एक्यबध्ता जनाउन सक्ने भन्दै आक्रमणको घटनाको डा.पञ्जियारले विरोध गरेका हुन् ।

‘राष्ट्रियताको नारा दिएर आन्दोलनकारीहरूमाथि गरिएको आक्रमण पूर्ण रुपले निन्दनीय छ’, उनले भनेका छन्, ‘यसले सामाजिक सदभाब बिथोल्नेछ । मधेसीहरुले देश जोगाउनका निम्ति गरेको यस अहिंसात्मक पहललाई हिंसामा परिणत गर्न खोज्नेहरु राष्ट्रवदी कदापि हुन सक्दैनन् ।’
डा.पञ्जियारले देशमा बस्ने सम्पूर्ण समुदायका वीचमा सौहार्दपूर्ण वातावरण रहोस भने आफूहरूको चाहना रहेको बताएका छन् ।

‘मधेसको गरिमाको निम्ति हामी जोसंग पानी बौद्धिक रुपले भिड्न तयार छौ’, उनले भने, ‘यस्तो घटनाहरू दोहरियो भने यसले समाजमा विद्रोहको अवस्था सिर्जना गराउँछ ।’

अध्यक्ष डा. पञ्जियारले मधेस र मधेसीको स्वाभीमानको निम्ति आफ्नो प्राण पनि त्याग गर्नका लागि तयार रहेको जनाएका छन् । उनले मधेसबिना देशको परिकल्पना कुनै पनि हालतमा सम्भब नरहेको उल्लेख गरेका छन् ।

Friday, July 15, 2016

Braking News: चिनको सेनाले मारियो २३ जना भन्दा धेरै सेना पूरा खबर आउन बाकी

- चीनले नेपालको सीमा क्षेत्रका नाकामा ग्रिनबेल्ट 

बनाउने प्रतिवद्धता जनाएको छ । वातावरण 
संरक्षणसँगै विकासका पूर्वाधारमा लागिरहेको चीनले नेपालसँगका नाका सडकमा बनाउने पूर्वाधारमा ग्रिनबेल्ट पनि निर्माण गर्न चासो देखाएको हो ।

चीनले तत्काल तातोपानी नाका र केरुङ नाकामा ग्रिनबेल्ट बनाउने, क्रमश: अन्य नाकामा पनि  बनाउँदै जाने नेपाली प्रतिनिधिमण्डललाई जानकारी दिएको छ ।

बुधबार बेइजिङमा वन तथा भूसंरक्षण मन्त्री अग्नि सापकोटासँगको कुराकानीमा चिनियाँ समकक्षी चङ चिआन लोङले उक्त कुरा बताएका हुन् ।

चिनियाँ राष्ट्रिय वन ब्युरोका महानिर्देशक चङ चिआन लोङ मन्त्री सरहको तहमा भएकाले चङसँग सापकोटाले बुधबार अपरान्ह चीनको वन प्रशासन ब्युरोको कार्यालयमा कुराकानी गरेका थिए ।

राजदूत महेश मास्केले कान्तिपुरलाई बताए अनुसार चीनले जैविक विविधता, भूसंरक्षण, जडिबुटी संरक्षण, लोपोन्मुख जीवजन्तुको संरक्षण आदि क्षेत्रमा नेपालसँग सहकार्य गर्न प्रतिवद्धता जनाएको छ ।

वार्तामा मन्त्री सापकोटाले मूलत: तीनवटा परियोजनामा सघाउन चीनसँग अनुरोध गरेका थिए । भक्तपुरको सूर्यविनायकमा स्थापना हुने बन्यजन्तु उद्यान अर्थात् चिडियाघरका लागि प्राविधिक तथा आर्थिक सहयोग आवश्यक रहेको चिनियाँ समकक्षीसमक्ष मन्त्री सापकोटाले राखेका थिए ।

त्यसैगरी वन्यजन्तु संरक्षण तथा अध्ययन अनुसन्धानका लागि बन्यजन्तु विधि विज्ञान प्रयोगशालाका लागि पनि उनले चीनसँग आर्थिक तथा प्राविधिक सहयोग माग गरेका थिए ।

यही परियोजना अन्तर्गत चीनले नेपालका लोपोन्मुख जीवजन्तु संरक्षण र जटिबुटीको खोज तथा अनुसन्धानमा सहयोग गर्ने प्रतिवद्धता जनाएको हो । मन्त्री सापकोटाले राखेको अर्को परियोजना सामुदायिक वन अन्तराष्ट्रिय केन्द्र स्र्थापना गर्ने रहेको थियो ।
    
बुधबार बिहान नेपालको वन तथा भूसंरक्षण मन्त्रालय र चीनको राष्ट्रिय वन व्युरोबीच स्थापित संयुक्त कार्यदल ‘जोइन्ट वर्किङ ग्रुप’को चौथो बैठक सम्पन्न भएको छ ।

बैठकमा नेपाली पक्षको नेतृत्व वन तथा भूसंरक्षण मन्त्रालयका सहसचिव विश्वनाथ ओलीले गरेका थिए भने चिनियाँ पक्षको नेतृत्व चीनको राष्ट्रिय वन ब्युरो अन्तर्गत अन्तराष्ट्रिय सहयोग विभागकी उपप्रमुख चाङ होङ यानले गरेकी थिइन् ।

बैठकमा हिमाली क्षेत्रको जलवायु परिवर्तनका नकारात्मक असरहरु कम गर्न, हिमाली क्षेत्रका वन्यजन्तु हिमचितुवा लगायतका जनावरको संरक्षण गर्न र हिमाली क्षेत्रको जडीबुटी संरक्षण गर्ने विषयमा छलफल भएको बैठकमा नेपाली पक्षका नेता सहसचिव विश्वनाथ ओलीले कान्तिपुरलाई बताए ।

संयुक्त कार्यलको पाँचौ बैठक नेपालमा बस्ने पनि सहमति भएको छ । नेपाल र चीनबीचमा सन् २०१० जुनमा वन तथा जैविक विविधता संरक्षण सम्बन्धमा द्वीपक्षीय समझदारीपत्रमा हस्ताक्षर भएको थियो ।

प्रधानमन्त्री ओलीको समर्थनमा यसरी सडकमा उत्रिए युवा (भिडियोसहित)


शुक्रबार, ३१ आषाढ, २०७३ मा प्रकाशित, 36670 पटक हेरिएको


काठमाडौं, असार ३१ । प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओलीको समर्थनमा युवाहरुले माइतीघरमन्डलामा प्रदर्शन गरेका छन् ।

शुक्रबार युवाहरुले प्रधानमन्त्रीमा ओलीकै निरन्तरताको माग गर्दै प्रदर्शन गरेका हुन् । युवाहरुले राष्ट्रिय झन्डा र प्लेकार्डसहित प्रदर्शन गरेका हुन् ।

ओलीले राष्ट्रिय स्वाभिमान बचाएको, भारतीय नाकाबन्दीको सामना गरेको, मुलुकलाई विकासको बाटोमा अग्रसर बनाएको भन्दै युवाहरु प्रदर्शनमा उत्रिएका हुन् ।

सामाजिक सन्जालमा खडा भएको ‘स्वतन्त्र युवा अभियान’को अगुवाइमा प्रदर्शन गरिएको हो ।

अनसन स्थलमा आक्रमण गर्न गएका एमाले कार्यकर्ताहरु लखेटिए


www.madhesh News, जनकपुर  ३१ असार ।


संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चासहित संघीय गठबन्धनले गरेको रिले अनसनको अन्तिम दिन विशेष कार्यक्रम भइरहँदा आक्रमण गर्न पुगेका एमाले कार्यकर्ताहरु लखेटिएका छन् ।

खुल्ला मञ्चको अगाडि भागमा भइरहेको कार्यक्रमलाई विथोल्न एमाले कार्यकर्ताहरुले पछाडीबाट ढुँगामुढा गरेका थिए । एमाले कार्यकर्ताहरुले ढुँगामुढा गर्न थाले पछि प्रहरीले हस्तक्षेप गरेका थिए । तर पनि ढुँगामुढा जारी राखेका एमाले कार्यकर्ताहरुलाई मोर्चा र गठबन्धनका कार्यकर्ताहरुले ढुँगामुढा गर्दै धपाएका थिए ।

‘आई एम विथ केपी ओली’लेखिएको टिसर्ट लगाएका र नेपालको झण्डा बोकेका करिब चार दर्जन एमाले कार्यकर्ताहरुले ‘केपी ओली जिन्दाबाद’ र ‘मधिशे मोर्चा मुर्दावाद’को नारा लगाउँदै ढुँगामुढा गरेका थिए ।

कार्यक्रम स्थलमा रहेका युवाहरु आक्रोसित हुँदै एमाले कार्यकर्ताहरुमाथि ढुँगामुढा गर्न थाले पछि एमाले कार्यकर्ताहरु भागेका थिए ।

ढुँगामुढाको क्रममा एमाले कार्यकर्ताहरुको ढुँगा लागेर मधेशी मोर्चाका कार्यकर्ता रंजित निश्पक्ष समान्य घाइतेसमेत भएका छन् ।

एमाले कार्यकर्ताहरुलाई लखेटेकोमा गठबन्धनका नेता कुमार लिंगदेनले सम्पूर्ण कार्यकर्ताहरुको हौसला बढाएका थिए ।

Braking News: जानकी मन्दिरका महन्थ रामतपेश्वरविरुद्ध रिट दायर


निजी अस्पताललाई गैरकानूनी ढंगले मन्दिरको जग्गा लीजमा दिएको आरोप

किरण कर्ण / सञ्चारक
जनकपुर, असार ३१ ।
जानकी मन्दिर अधिनस्त फुलबारीको जग्गा अतिक्रमण गरी एउटा निजी अस्पताल निर्माण भइरहेको भन्दै स्थानीय युवाको एक समूहले जानकी मन्दिरका महन्थ रामतपेश्वर दाससहित दर्जनौं सरोकारवाला उपर पुनरावेदन अदालत जनकपुरमा मुद्दा दिएको छ ।

अगुवा युवक सुशिल कुमार कर्णसहितका युवाले पुनरावेदन अदालत जनकपुरमा उत्प्रेषण, परमादेश तथा निषेधाज्ञाको आदेश जारी गरी पाउँ भन्दै निवेदन दिएको हो । पुनरावेदन अदालतले सो रिटलाई दर्ता गरी  आइतबारका लागि पेशी तोकेको छ ।

जानकी मन्दिरको फुलबारीमा मन्दिरका महन्थ र जानकी मन्दिर सञ्चालक समिति तथा रामजानकी हस्पिटल प्रालिसमेतको मिलोमतोमा जनकपुर वडा नम्बर ६ सिट नम्बर १३५५२३, कित्ता नम्बर ५२ को ०–१४–२–३ जग्गा रामजानकी हस्पिटल खोल्न ठेक्का सम्झौता गरिएको छ ।

फुलबारीको जग्गालाई ठेक्कामा दिएर सम्पूर्ण हिन्दु धर्मावलम्बीहरुको आस्थामा चोट पुर्याउने कार्य भएको र सार्वजनिक सम्पती अतिक्रमण हुन जाने भएको भन्दै बृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद जनकपुर र सो कार्यालयका प्रमुख, सोही परिषदका अध्यक्ष, जानकी मन्दिर विकास समिति, मन्दिरका महन्थ रामतपेश्वर दास वैष्णव, जानकी मन्दिर, धनुषाका प्रमुख जिल्ला अधिकारी र जिल्ला प्रशासन कार्यालय धनुषा, जनकपुर उपमहानगरपालिकाको कार्यालय र सो कार्यालयका प्रमुख, रामजानकी हस्पिटल प्रालिको सञ्चालक समिति, गुठी संस्थानको धनुषा शाखा कार्यालय र सो कार्यालयका प्रमुखसहितलाई विपक्षी बनाई रिट निवेदन दिइएको छ ।

फुलबारीको जग्गालाई विपक्षीहरुको मिलोमतोमा जानकी मन्दिरको महन्थलगायतका जानकी मन्दिर विकाससँग सम्बन्धित व्यक्ति र जानकी मन्दिर व्यवस्थापन समितिले गैरकानुनी तरिकाले २१ वर्षका लागि लीज (ठेक्का)मा दिएका छन् ।
युवकहरु सुशील कर्ण, किसनकुमार मण्डल, बिटुकुमार पञ्जियार र मोहनकुमार रौनियारलगायतकाले तराई मानवअधिकार रक्षक सञ्जाल (थर्ड एलायन्स) को सहयोगमा रिट निवेदन दायर गरेका हुन् भने सो मुद्दामा रिट निवेदकका तर्फबाट अधिवक्ता कौशलेन्द्र लाल कर्णले बहस गर्नेछन् । 


रिट निवेदक सुशील कर्ण

सो रिटमा जानकी मन्दिर धार्मिक र साँस्कृतिकरुपले सम्पन्न मैथिली सभ्यताको धरोहर भएको भन्दै यस्तो धरोहरमा र सोको सम्पतीहरुमा कसैले कुनै प्रकारबाट हनन गर्न नपाउन तथा जानकी मन्दिरको सम्पती संरक्षण होस् भन्ने उद्देश्यले सरकारले विभिन्न निकाय बनाए पनि ती विपक्षी सरकारी कार्यालयहरु सोप्रति ध्यान नदिएको हुँदा रिट निवेदन दर्ता गराइएको उल्लेख छ ।

रिट निवेदनमा. जनकपुर उपमहानगरपलिका वडा नं. ६ स्थित क्षेत्रफल ०–१४–२–३ जग्गाको सिट नम्बर १३५५२३, कित्ता नम्बर ५२ रहेको जानकी मन्दिरको फुलबारीको जग्गालाई कुनै प्रकारबाट अक्रिमण हुन नदिन विपक्षीहरुको नाउँमा निषेधाज्ञाको अन्तरिम आदेश जारी गरी उत्प्रेषणको आदेशबाट ठेक्काको सम्झौता बदर गर्दै जानकी मन्दिरको सो सम्पती संरक्षण गर्न परमादेशको आदेश जारी गरी पाउँ भनि माग गरिएको छ ।

फुलबारीको जग्गालाई विपक्षीहरुको मिलोमतोमा जानकी मन्दिरको महन्थलगायतका जानकी मन्दिर विकाससँग सम्बन्धित व्यक्ति र जानकी मन्दिर व्यवस्थापन समितिले गैरकानुनी तरिकाले २१ वर्षका लागि लीज (ठेक्का)मा दिएका छन् ।

ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं साँस्कृतिक धरोहर जानकी मन्दिरको क्षेत्राधिकारभित्रको सो सार्वजनिक जग्गामा जानकी मन्दिर र जानकी हस्पिटल प्रालिबीच सम्झौता भई गैरकानूनी तरिकाले अस्पताल सञ्चालनका लागि भवन निर्माण सुरु भईसकेको छ । निर्माण कार्य दु्रतगतिमा भइरहेको छ ।

रिटमा गैरकानुनीरुपमा भइरहेको अस्पताल निर्माण कार्य रोक्नुका साथै सम्झौता बदर गर्न पनि माग गरिएको छ ।

Wednesday, July 13, 2016

Braking News: अमेरिकाले साउन 7 गते सम्म चीनलाई ध्वस्त पार्ने दियो धम्की ( चीन ले सुरु गर्‍यो ...................?

जनकपुर: असार ३० गते ।

चीनले विवादित दक्षिण चीन सागरमा बनाएको कृत्रिम टापुमा जंगी हतियार जुटाइरहेको अमेरिकाले सार्बजनिक गरेको छ । अमेरिकी अखबार वाल स्ट्रिट जर्नलले अमेरिकी अधिकारीको हवाला दिंदै एक रिपोर्टमा यसको दाबी गरेको छ ।

अमेरिका र चीनबीच युद्ध हुन सक्ने

अमेरिकाले यस दाबीको सबुतको रुपमा एक तस्विर सार्वजनिक गरेको छ । जसमा टापुको आसपास तोपखाना देखिन्छन् । तर अधिकारीका अनुसार चीनको उक्त टापुमा मोबाइल आर्टलरी हतियार भने देखिन छाडेका छन । उनीहरु भन्छन्, यसको कि हटाए कि लुकाए ।

अचम्मको कुरा भने यो छ कि चीनले यही हप्ता आफ्नो एयरफोर्सको नीति बदल्ने घोषणा गरेको थियो । साथै दक्षिण चीनको सागरमा कृत्रिम टापु बनाउने खुलासा समेत गरेको थियो ।

अमेरिका र चीनबीच खतरनाक साइवर युद्ध शुरु

अमेरिकी सिनेटर जोन म्याक्कनले भने, चीनले विवादित क्षेत्रमा तनाब पैदा गरिरहेको छ । उनले भने, दक्षिण चीन सागरमा यसरी तोप राखिनु तनाव बढाउने कुरा हो । चीनले अन्तराष्ट्रिय नियमको उल्लंघन गरिरहेको छ । हामी चीनको साथमा झगडा चाहदैनौं ।

यस्तोमा चीनका प्रवक्ताले भने आफूलाई हतियार राखेको बारेमा थाहा नभएको बताएका छन । केही समय अगाडि देखि नै चीनको दक्षिण सागरमा अमेरिका र चीन एक आपसमा भिडेको खबरहरु आईरहेका छन । यसको पुरै भागमा चीनले दाबी गर्दै आएको छ । चिनिया एयरफोर्सले यस विवादित टापुमा घुमिरहेको अमेरिकी एयरक्राफ्टलाई त्यहाबाट हट्नको लागि भनेको थियो । यसपछि दुबै देशको बीचमा तनाव बढेको छ ।

घुस नदिँदा सप्तरीमा मालपोत कर्मचारीबाट सेवाग्राही निर्घात कुटिए (फोटो फिचर समेत)


जनकपुर , ३० असार ।

 सरकारी कर्मचारीले मागेको घुस नदिएपछि राजविराज स्थित मालपोत कार्यालयका कर्मचारीहरुबाट बुधवार एक सेवाग्राही निर्घात कुटिएका छन् ।

जग्गा रजिष्ट्री गराउनकालागि मालपोत कार्यालय आएका राजविराज नगरपालिका वडा नम्वर–१० का ३४ वर्षिय श्यामप्रसाद साह करिब ४.१५ बजेको समयमा यसरी कुटिएका हुन् । जग्गा रजिष्ट्री गराउनकालागि प्रक्रिया अगाडि बढाउने क्रममा रजिष्ट्रेशन फाँटका कर्मचारी धर्मेन्द्र खड्का र योगेन्द्र अधिकारीले चाँडो काम अगाडि बढाई दिने भन्दै आफूसँग दुई सय रुपैयाँ मागेको पीडित साहले बताए । 
आफूले घुस नदिने अडान लिएपछि कागज फालिदिएको तथा आफूले ‘सेवाग्राहीको काम गर्नु तपाईहरुको दायित्व हो’ भनेपछि फाँटका कर्मचारी खड्का, अधिकारीले गाली–गलौज गर्दै कुट्न थालेको उनले जानकारी दिए । आफूलाई कुट्न थालेको देखेर मालपोत कार्यालयका जामुन साह, पशुपती देवलगायतले मुक्का, रड र धारिलो हतियारले हिर्काएको बताउँदै उनले भने ‘शुरुमा त दुई जनाले कुट्यो, त्यसपछि कार्यालयका अन्य कर्मचारीहरु समेत आएर मलाई मरणासन्न हुने गरी कुटेको अन्य सेवाग्राहीले देखेपछि उनीहरुले नै जोगाईदियो ।’
सेवाग्राहीहरुलाई असह्य भएपछि आफूलाई थप कुटपीटबाट जोगाएको जानकारी दिँदै आफू कार्यालयमा सेवा लिन आएकोमा घुस नदिएपछि यसरी मरणासन्न हुने गरी कुटाई खानुपर्ने दुःखेसो सुनाए । जिऊभरी निलडाम तथा घाउ देखाउँदै उनले भने ‘सरकारी कार्यालयमा सेवाग्राहीले काम गराउन जाँदा पहिला घुस मागिन्छ र नदिएपछि कर्मचारीबाट कुटाई खानुपर्ने अवस्था छ, यसरी खुलेयाम घुस मागिन्छ र नदिएपछि कानूनलाई हातमा लिएर डनको शैलीमा कुटिन्छ ।’ कार्यालयमा सेवाग्राहीसँग यस्तो व्यवहार गर्ने कर्मचारीलाई कडा कार्वाही गर्न पीडित साहले माग गरेका छन् ।
सयौं सेवाग्राहीका बीच कर्मचारीहरुले आफ्नो मर्यादालाई समेत विर्सेर सेवाग्राही साहलाई कार्यालयबाट कुटपीट गर्दै गेटसम्म पुर्याएको प्रत्यक्षदर्शी फर्सैठ–९ का चन्द्रनारायण यादवले बताए । मालपोत कार्यालयमा बिना घुसको काम गर्न कर्मचारीहरुले नमान्ने पुरानो रोग रहेको टिप्पणी गर्दै उनले भने ‘बिना घुस मालपोत कार्यालयमा कुनै काम हुदैन, घुस नदिएपछि काममा ढिलासुस्ती हुन्छ ।’
यता जिल्ला प्रहरी कार्यालय सप्तरीका प्रहरी नायव उपरीक्षक दानबहादुर कार्कीको नेतृत्वमा आएको टोलीले आरोपित कर्मचारी र पीडित साहसमेतलाई भ्यानमा राखेर जिल्ला प्रहरी कार्यालय लगेको छ । सोही क्रममा कर्मचारीहरुको तस्विर खिंच्ने क्रममा स्थानीय विवेक साहलाई समेत प्रहरीले पक्राउ गरेको छ ।
स्मरण रहोस् डेढ वर्ष अघि अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोगको टोलीले कार्यालयका प्रमुखलाई घुस वापतको रकमसहित रङ्गेहात पक्राउ गरेको थियो । यस अघि पटक–पटक मालपोत कार्यालयका फाँटवाला कर्मचारी र सेवाग्राही बीच लेनदेनको विषयमा विवाद हुँदैआएको 

हे मधेश के वीर सपूतों ! जागो, अब रात नहीं, सुबह हो गई है : गंगेश मिश्र बिचार, मधेश


गंगेश मिश्र, जनकपुर :असार २८

भारत को आज़ादी के लिए, नब्बे साल इन्तज़ार करना पड़ा; और मधेश तो, अभी-अभी जगा है।
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धैर्य ही है जो डटे रहने को प्रोत्साहित करता है हमें, और हम पथरीले पथ पर जूझते हुए भी अग्रसर होते रहते हैं।आज मधेश को उसी धैर्य और साहस का परिचय देना है, और दिखा देना है दुनियाँ को, हम देर से भले जगे किन्तु हमनें अपनी पहचान को, सम्मान को, स्वाभिमान को पा लिया है; उसे मिटने नहीं दिया।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल सन् 1857 में पहली बार बजा; और आज़ादी मिली नब्बे सालों बाद सन् 1947 में।वीर शहीदों ने हँसते-हँसते, मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी; एक ज़ुनून था आज़ादी का।सरदार भगत सिंह, चन्द्र शेखर आज़ाद, पं. रामप्रसाद ‘ बिस्मिल ‘, नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेकों माँ के लालों ने भारत माँ की आज़ादी के लिए सब कुछ न्योछावर कर दिया।
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” उठ जाग मुसाफ़िर भोर भई,
अब रैन कहाँ जो सोवत है,
जो सोवत है वो खोवत है;
जो जागत है वो पावत है।”
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हे मधेश के वीर सपूतों ! जागो, अब रात नहीं,  सुबह हो गई है। अपने अधिकार के लिए, आत्मसम्मान के लिए पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बनाओ।अधिकारों की लड़ाई लम्बी चलती है, इसके लिए धैर्य चाहिए होता है; धैर्य को संबल बनाओ। क्योंकि अधिकार है तो सब कुछ है, अन्यथा पर कटे पंक्षी की फड़फड़ाते रह जाओगे; जैसा की आजतक मधेश भोगता आया है, हजारों धोखे खाकर।अब शान्त नहीं बैठना, खड़ा हो जाना है सीना तानकर; मुक़ाबला करना है, अधिकारों के अपहरणकर्ताओं से।

Tuesday, July 12, 2016

संशोधन नभएसम्म कुनै पनि सरकारमा जाँदैनौं : गठबन्धन संयोजक


जनकपुर : असार २८ ।

 संविधानप्रति असन्तुष्टि जनाउँदै आएको संघीय गठबन्धनले सविधान संशोधन नभएसम्म कुनै पनि सरकारमा नजाने स्पष्ट पारेको छ ।

आवश्यक नै परियो भने नयाँ सरकार बनाउन सहयोग गरिदिन्छौ तर सरकारमा जान्नौ बिषेश कुराकानीमा सघिंय समाजवादी फोरमका अध्यक्ष उपेन्द्र यादवले भने “हाम्रो पहिलो प्रथमिकता हाम्रो माग पुरा हुनु हो सरकार तिर हामि सोचेका छैनौ ।”

गठबन्धनमा आबद्ध मधेसकेन्द्रित दल र जनजाति समूहहरु यति बेला राजधानीमा अनसन बसिरहेका छन् । गठबन्धनका संयोजक समेत रहेका यादवले माओवादीले सरकारबाट समर्थन लिने निर्णयलाई आफूहरुले स्वागत समेत गरिसकिएको बताए ।

३६ दिनदेखि रिले अनसनमा रहेको जनाउदै गठबन्धनका दलहरु जुनै सरकार आए पनि संविधान संशोधन नभएसम्म सरकारमा नजाने बताए ।

हर सुवह जब जनकपुर की महान सभ्यता फिरंगियों के बलात्कार से चीखती है !

जनकपुर : असार २९
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सुवह लगभग ४:३० बजे जब मैं जनकपुर में उठता हूँ, तो शीतल हवा के झोंको के साथ कोई पराती की आवाज नहीं, विद्यापति का कोई गीत नहीं, जानकी मैया का कोई भजन नहीं, अपनी मिट्टी की कोई स्तुति नहीं, मृदंग या ढोल का कोई ताल नहीं, बल्कि फिरंगी नेपाल सेना के परेड की आवाज आती है, और हवा के झोंकों में सुवह सुवह "मादल" की आवाज के साथ "सयौं थुंगा फुलका हामी, एउटै माला नेपाली", "आयो नेपाली" गीत गुञ्जती है। 

और जनकपुर जैसे महान सभ्यता का यह बलात्कार जनकपुर की २ लाख जनता निरिहता के साथ, हरेक दिन, होते हुए देखती है, चित्कार हरेक दिन सुनती है ! अब तो बहुत सारे जनकपुरवासी इस रोजाना के बलात्कार से अभ्यस्त हो चुके हैं, और इस बलात्कार में कोई बुराइयां तक भी नहीं देख पाते ! 

सुवह-सुवह जानकी मैया की छाती पर अपने बूट से रौंदते हुए जब फिरंगी नेपाली सेना मार्च करती है, और सुवह सुवह जब फिरंगियों का वह धून "आयो नेपाली" सुनना पड़ता है, तो बस हर सुवह वही कसम दोहराता हूँ कि जब तक इस फिरंगी नेपालियों से मधेश मां को आजाद करके, यहां के हवा में सुवह सुवह मधेश आजादी का गीत न गुंजे, जब तक जानकी मैया की छाती पर नेपाली फिरंगियों का वह ताण्डव नृत्य बंद न कर दूँ, तब तक चैन का एक भी सांस लेने का मुझे कोई हक नहीं ! वस यही प्रण के साथ मेरा हर दिन जनकपुर में प्रारम्भ होता है !

कांग्रेस–माओवादीबीच सातबुँदे सहमति, मधेश आन्दोलनको माग सम्बोधन गर्ने प्रतिबद्धता



जनकपुर , २८ असार ।

 नेकपा एमालेका अध्यक्ष केपी शर्मा ओली नेतृत्वको सरकार ढाल्न नेपाली कांग्रेस र नेकपा माओवादी केन्द्रबीच ७ बुँदे सहमति भएको छ । कांग्रेस र माओवादी केन्द्रको संयुक्त सरकार निर्माणका लागि एक सहमतिपत्रमा कांग्रेसका सभापति शेरबहादुर देउवा र माओवादीकेन्द्रका अध्यक्ष प्रचण्डले हस्ताक्षर गरेका छन् ।

सो सहमति पत्रको प्रथम बुँदामा मधेश आन्दोलनमा उठेका मागहरुलाई दृष्टिगत गरी राजनीतिक सहमतिका आधारमा सीमांकन लगायतका मागहरु सम्बोधन गर्न संविधानमा आवश्यक सम्बोधन गरी संविधानको सर्वस्वीकार्यताका लागि राजनीतिक सहमतिको वातावरण बनाउने उल्लेख गरिएको छ । 

देशमा शान्ति, सुरक्षा र सुशासनको प्रत्याभूति गर्न कालोबजारी, कृत्रिम अभाव, महँगी अन्त गरी दैनिक उपभोगका सामग्री सहज उपलब्ध हुने व्यवस्था गर्ने प्रतिबद्धता जनाइएको छ ।

Monday, July 11, 2016

कान्तिपुर News को whats the flop कार्यक्रम चलाउने पत्रकारलाई dr .raut को कार्यकर्ताले दियो जानबाट मार्ने धम्की .....?

Janakpur:  asadh २८

Artist Satya Raj Acharya has reported that he will compose a life story of his dad Bhakta Raj Acharya. The iconicmusician’s mainstream melodies incorporate ‘Jahan Chhan Buddhaka Aankha’ and ‘Mutu Jali Rahecha’.

Bhakta Raj AchryaHe consented to an arrangement with Ganesh Prasad Subedi of Phoenix Books, the distributer, at Mandala Theater in Anamnagar on Thursday.

To begin taking a shot at the memoir, the distribution gave over Rs 100,000 to the Acharya family as eminence amid the occasion.

“We feel favored to distribute the life story of an acclaimed individual from Nepali music industry,” Subedi said.

Satya Raj shared that despite the fact that a film titled “Acharya” in view of his dad’s life story was made before, numerous individuals didn’t get the opportunity to watch it, because of which he had a craving for thinking of a history in a composed structure.

Braking News : अबको १ महिना भित्रमा यो निकम्मा सरकार ढाल्ने छौँ अध्यक्ष दहालको भनाइ ......?

जनकपुर , असार २८ । 

आफ्नै नेतृत्वमा राष्ट्रिय सहमतिको सरकारका लागि दौडधुप थालेका माओवादी केन्द्रका अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाललाई दुई ठूला दल कांग्रेस र एमालेले समर्थन नगर्ने जनाउ दिएका छन् ।

सहमतीय सरकार बन्ने सम्भावना कम देखेपछि दाहाल बहुमतीय सरकारको विकल्पमा जाने÷नजाने द्विविधामा छन् ।

सहमतीय सरकार बन्न सम्भव नरहेको बताउँदै आएको कांग्रेसले बहुमतीय सरकारका लागि भने दाहाललाई समर्थन गर्ने संकेत दिएको छ । अहिलेको गठबन्धनबाट अलग भएपछि मात्रै कांग्रेसले त्यसबारे औपचारिक निर्णय लिने स्रोतले बतायो ।

राष्ट्रिय सरकारका लागि समर्थन खोज्न गएका दाहाललाई कांग्रेस सभापति शेरबहादुर देउवाले सम्भव नभएको जवाफ दिए ।

कांग्रेस संसदीय दलमा सोमबार अपराह्न २० मिनेट देउवा र दाहालबीच छलफल भएको थियो ।

भारत ने दिया नेपालको कडा चेतावनी मोदि सरकार ने भारत के बारेमे अनाब सनाब नबोले नेपाल वर्न ..........?

जनकपुर: 
२७/३/२०७३

भारत का अहम पड़ोसी देश नेपाल के नागरिकों ने अपनी निर्वाचित संविधान सभा  द्वारा जिस संविधान को अंगीकार किया है उसे बनाने में 6 साल से अधिक का समय लगा है और इस दौरान 2 बार संविधान सभा का निर्वाचन करना पड़ा। 20 सितंबर 2015 को नेपाल ने अपने को “संप्रभुतासम्पन्न, लोकतान्त्रिक, धर्मनिरपेक्ष गणराज्य” घोषित करते हुए अपने देश के नागरिकों को बहुत तरह के अधिकार दिए हैं जिससे नेपाल के अधिकतर आवाम में एक ख़ुशी और संतुष्ठी का भाव है वहीं नेपाल के तराई के हिस्से में रहने वाली मधेशी सहित कुछ जनजातियां अपने को ठगा महसूस कर रही है। जब से नेपाल में नया संविधान लागू हुआ है भारत के साथ उसके सम्बन्ध भी बिगड़ते ही जा रहे हैं। भारत ने खुल कर नेपाल के मधेशी लोगों की मांगों का समर्थन किया है। 

नए संविधान के लागू होने के दिन से ही नेपाल में आन्दोलन और विरोध प्रदर्शन का दौर जारी है जिससे एक ओर जहां पुलिस और आमजन के बीच तनाव व्याप्त है वहीं दूसरी ओर भारत से जाने वाली पेट्रोलियम पदार्थ व अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति बाधित है। इससे नेपाली आवाम को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

इन सब का असर भारत-नेपाल संबंधों पर भी पड़ रहा है। नेपाल का मानना है कि भारत ने उसके संविधान का उस प्रकार स्वागत नहीं किया जिस प्रकार एक पड़ोसी सम्प्रभु राष्ट्र के साथ करना चाहिए। भारत की प्रतिक्रिया नेपाल में रह रहे भारतीय मूल के लोगों और संविधान के कुछ प्रावधानों से नाखुश वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर की गयी जान पड़ती है। इसका असर यह हुआ है की नेपाल में भारत विरोधी दल और संगठन आज भारत के विरोध में आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

एक तरह से यह भारत जैसे सुलझे हुए लोकतान्त्रिक देश की कूटनीतिक विफलता के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि नेपाल में किसी भी तरह से अशांति नेपाल से लगे बिहार, उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि पुरे देश के लिए समस्या की बात हो सकती है खास कर व्यापारिक और सांस्कृतिक हित काफी प्रभावित होने की संभावना है। इस मौके का फायदा पड़ोसी देश चीन भी उठाने से बाज़ नहीं आ रहा।

कूटनीतिक तौर पर देखा जाय तो भारत को अभी अपनी निष्पक्ष भूमिका निभाते हुए इसे पूर्णरूप से नेपाल का आंतरिक मामला मानकर अभी कुछ दिन बिल्कुल चुप होकर देखना चाहिए क्योंकि नेपाल की भारत पर निर्भरता इस रूप में है कि  नेपाली सरकार और वहां की जनता भारत की कई क्षेत्रों में सहयोग की जरूरत होती है और इसलिए हमारे आतंरिक सम्बन्ध लम्बे समय तक खराब शायद ना रहे। भारत भी किसी और देश की नेपाल में बढ़ती दखलंदाज़ी से चिंतित होकर नरम पड़ेगा ही।

यदि नेपाल के नए संविधान के कुछ वैसे प्रावधानों की चर्चा करें जिसने मधेशियों और कुछ जनजातियों को आंदोलन करने को बाध्य किया है तो उसमें सबसे अहम वे प्रावधान हैं जिसके तरह ये लोग नेपाल में “Second Citizenship” का शिकार हो सकते हैं और इन सब को उच्च संवैधानिक पदों पर चयनित या नियुक्त होने से वंचित होना पड़ेगा। एक और प्रावधान जो इन आबादी को नए बनने वाले 7 प्रान्तों में अल्पसंख्यक बनाती है उसको लेकर चिंता है। ऐसे ही कुछ प्रावधान हैं जो नेपाल के तराई में रहने वाली करीब 35 फीसदी आबादी को समान अवसर प्रदान करने से रोकती है।


अब यदि ये प्रभावित लोग नेपाल के नए संविधान से संतुष्ट नहीं होने के कारण विरोध कर रहे हैं तो भारत को अपनी रणनीति को काफी संतुलित रखने की जरुरत है क्योंकि यदि 65 वर्षों बाद काफी जद्दोजहद कर नेपाल ने अपने नागरिकों के लिए अपना संविधान तैयार किया है तो उसमें अपने नागरिकों के हितों का ख्याल करने और सबको साथ लेकर चलने की संभावना दिख रही है। समय के साथ वे खुद अपने नागरिकों के लिए एक समावेशी अर्थव्यवस्था वाला देश बनाने में समर्थ हो सकता है क्योंकि दुनिया का सबसे बड़ा लोकत्रंत्र भारत ने भी पिछले 68 सालों में अपने संविधान में 100 संशोधन किये हैं फिर भी यहाँ के सभी नागरिकों के हितों का संरक्षण नहीं हो पाया है।

नेपाल के नए संविधान में कुछ प्रावधान काफी प्रशंसनीय हैं जैसे नेपाली संसद और प्रान्तों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण जबकि भारत में अभी भी यह होना बांकी है।

उल्लेखनीय है की नेपाल के पर्वतीय इलाकों में रहने वाली 35 फीसदी मूल नेपाली का अर्थव्यवस्था के अधिकांश हिस्सों पर कब्ज़ा है जिस कारण से भी ऐसे कुछ प्रावधानों को लेकर तराई के लोगों में गुस्सा है।

नेपाल में चीन की रुचि सिर्फ इतनी भर है कि उसके जरिये वह भारत पर सामरिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बना सके। इसके अलावे चीन उसके आंतरिक मामलों में दखल नहीं बराबर देता है। कांग्रेस की सरकार पिछले दो दशक से नेपाल को लेकर उदासीन थी। परिणाम हुआ , वह धीरे धीरे चीन के प्रभाव में आने लगा। यह उसकी मजबूरी थी।

मोदी सरकार ने लगभग 20 सालों के बाद पिछले साल नेपाल की यात्रा कर एक अच्छी पहल की थी जिससे वर्षों से आपसी रिश्तों में जमी हुई बर्फ को थोड़ी उष्णता मिली थी और बर्फ पिघला भी था। दूसरा अच्छा काम मोदी ने नेपाल में आये भीषण भूकम्प में त्वरित पहल कर मदद पहुंचा कर की थी। अच्छा चल रहा था। लेकिन सारे किये कराये पर पानी तब फिर गया जब नेपाल संविधान निर्माण प्रक्रिया से गुजर रहा था। अब नेपाल ने भारत से छुटकारा पाने की कोशिश में चीन से पूरी तरह हाथ मिलाया और हिन्दुतान की ऊँगली तो तोड़ ही दी है।


जब सारी दुनिया में धर्मनिरपेक्ष और नास्तिक लोग दिनों दिन बढ़ते ही चले जा रहे हैं तब यह भारत के दक्षिणपंथी नेपाल को हिन्दू राष्ट्र घोषित करवाने के लिए संविधान में प्रावधान के लिए दबाव बना रहे थे। नेपाल एक सम्प्रभु राष्ट्र है। आप एक मित्र की हैसियत से संविधान निर्माण में मदद करते , यह अलग बात थी। लेकिन आपने तो उसकी गर्दन नहीं दबोच सकते।


जिन प्रावधानों को शामिल करने के लिए उनसे सलाह मशविरा करना था उस पर तो आप मौन थे। और जिन बातों से आपको कुछ मतलब नहीं होना चाहिए था , उसको लेकर ऊँगली करने लगे। परिणाम ? आपके नियंत्रण से बाहर जा चूका है नेपाल। ओ पी शर्मा ओली वैसे भी भारत विरोधी तेवर के लिए जाने जाते हैं। 

विश्लेषकों का मानना है की अभी भारत को नेपाल में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति अबाध रूप से सुनिश्चित करने के पुरे प्रयास करने चाहिए। भारत से नेपाल जाने के करीब 16-17 मार्ग हैं लेकिन आंदोलन और विरोध प्रदर्शन केवल 6-7 रास्तों पर ही हो रहा है। इसलिए अन्य रास्तों से सामानों की अबाध आपूर्ति बहाल हो जिससे नेपाल में भारत विरोधी दल और संगठन को भारत के खिलाफ बोलने का मौका न मिले साथ ही कूटनीतिक स्तर पर अपनी बात उचित मंच में रखने की रणनीति अपनाया जाये तो भारत-नेपाल व्यापारिक और सांस्कृतिक सम्बन्ध भी मधुर बने रहेंगे और तराई में रहने वाले नेपाली नागरिकों को भी समय के साथ अपने अधिकार मिल सकेंगे।

फिलहाल तो वर्तमान स्थिति को नरेन्द्र मोदी सरकार की विदेश नीति पर बड़ा धक्का ज़रूर माना जा रहा है।

braking news : भर्खर जम्बु कस्मिर से आ रहा हे समेचार मुस्लिम ने मारे 100 हिन्दु ओ को फिर.........?

जनकपुर :
२७/३/२०७३

सुरक्षाबलों के साथ हुई मुठभेड़ में आतंकी बुरहान की मौत के बाद आज सुबह घाटी में 500 कश्‍मीरी नागरिकों ने सेना के एयरबेस पर हमला कर दिया। ये लोग कश्‍मीर में जिहाद के नाम पर घाटी में जंग का ऐलान कर चुके हैं। बीते दिन भी कश्‍मीरी मस्जिदों में देश विरोधी नारे लगाए गए थे। अब मोदी सरकार ने इसके खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं।



गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने इस हमले के बाद जम्‍मू कश्‍मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती से फोन पर बात की और उन्‍हें पूरी तरह से मदद देने का भरोसा भी जताया। मामले को ज्‍यादा गंभीर होता देख गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री के साथ विपक्ष के नेता उमर अब्‍दुल्‍ला से भी फोन पर बातचीत की है और उनसे कहा कि इस मामले पर राजनीति न की जाए। वहीं दूसरी तरफ राजनाथ ने कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से भी बात की। उन्‍होंने सोनिया से इस मामले पर राजनीतिक द्वैष को किनारे करने को कहा और केंद्र सरकार के साथ खड़े रहने का भी आग्रह किया। खबरों के मुताबिक सोनिया ने भी राजनाथ को मदद का आश्‍वासन दिया है।

वहीं इस मामले पर केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने अलगाववादियों पर निशाना साधा है। नायडू ने कहा कि उन्‍हें यह बात जानकर हैरानी होती है कि कुछ लोग आतंकियों को सपोर्ट कर रहे हैं। वह हिजबुल मुजाहिद्दीन का कमांडर था। कैसे कोई भारतीय उसके साथ सहानुभूति रख सकता है? वहीं इससे पहले बुरहान की मौत के बाद कश्‍मीर में भड़की हिंसा में 23 लोग मारे जा चुके हैं और करीब 200 से ज्‍यादा लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के थानों से हथियार लूटने और सरकारी बिल्डिंग्स को जलाने का भी आरोप है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने मिलकर एक पुलिस जीप को नदी में फेंक दिया था। इसमें एक पुलिसवाले की मौत हो गई थी।